Tuesday, December 6, 2022
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RBI Repo Rate Breakout : loan चुकाने वालों को बड़ा झटका, अब रेपो रेट बढ़ने से कटेगी जेब और देनी होगी ज्यादा राशि

RBI Repo Rate: आज आरबीआई ने रेपो रेट को बढ़ाकर 5.9% कर दिया है, पहले यह 50 बेसिस प्वाइंट पर थी। अब रेपो रेट बढ़ने से सभी बैंकिंग लोन महंगे होने तय हैं । अब कर्ज लेना महंगा तो होगा ही इससे EMI भी बढ़ जाएगी,RBI ने लगातार चौथी बार इस प्रकार से 0.50% रेपो रेट बढ़ाया हैं ।

क्या होती हैं रेपो दर ?
दरअसल रेपो रेट वो मापक दर होती है जिस पर आरबीआई अन्य बैंकों को कर्ज प्रदान करती हैं ।इसके विपरीत रिवर्स रेपो रेट उस ब्याज दर को कहते हैं जो आरबीआई के पास पैसा रखने पर केंद्रीय बैंक बैंको को देती है। मॉनिटरी पॉलिसी की बैठक ( RBI Monetary Policy Meeting) के बाद गर्वनर शक्तिकांत दास ( Shaktikanta Das) ने ये घोषित किया, आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास (Shaktikant Das) ने इस फैसले पुष्टि कि हैं। अब पांच महीने में 1.90 फीसदी की बढ़ोतरी हो चुकी है ।

इसके विपरीत रिवर्स रेपो रेट भी होता हैं जिसके अनुसार आमतौर पर यह माना जाता है कि अगर आरबीआई रेपो रेट घटाएगा तो बैंक ब्याज दर कम करेंगे और अगर रेपो रेट बढ़ाता है तो बैंक ब्याज दर बढ़ाएंगे। इसका मुख्या असर यह होता हैं कि आम आदमी को मिलने वाला लोन महंगा हो जाता हैं ।

पहले से ज्यादा चुकानी होगी EMI
इस फैसले के बाद Home Loan, Car Loan, Education loan महंगे होने तय है. पहले से लोन लिए हुए लोग अब पहले से ज्यादा ईएमआई चुकाने को मजबूर हो जाएंगे. आरबीआई गर्वनर ने रेपो रेट में बढ़ोतरी का फैसला मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी की तीन दिनों की बैठक के बाद लिया है. आंकड़ों के अनुसार अगस्त महीने में खुदरा महंगाई ( Consumer Price Index) दर 7 फीसदी पर बना रहा. 28 सितंबर को कमिटी की बैठक की शुरूआत हुई थी यही कारण रहा हैं कि आबीआई को महंगाई पर पर रोक लगाने के अनुबंधों के अनुसार ब्याज दरें बढ़ाने का फैसला लेना सुनिश्चित करना पड़ा.

कैसे होता हैं भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा रेपो रेट का प्रयोग

बाजार में मुद्रा के प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा रेपो रेट का प्रयोग किया जाता हैं। जब जब बाजार में महंगाई का ग्राफ बढ़ने लगता हैं तब आरबीआई रेपो रेट नमक अचूक हथियार से उसे रोकने का प्रयास करता हैं. लेकिन महंगाई इससे रूकती नहीं बल्कि आम आदमी के आर्थिक जीवन पर इसका अधिक प्रभाव कड़ता हैं. बढ़ी हुई रेपो रेट का मतलब होता है कि जो बैंक आरबीआई से पैसे लेंगे उन्हेंं वह पैसा बढ़ी हुई ब्याज दर पर उपलब्ध कराया जाएगा। लेकिन यहाँ लोन लेने वालो के ऊपर यह सीधी मार पड़ती हैं जिसके कारण लोन लेने वाले वाले लोग दिवालिया तक हो जाते हैं.

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